१३ जुलै, २०१६

Translation: Remember when (Alan Jackson)


आठवतं तुला?
ऐन तारुण्यात होतो मी, अन् तूही
काळ थबकला होता; जणू आपल्यासाठीच
आपण मात्र आकंठ बुडालो होतो प्रेमात..
पहिलंच प्रेम होतं तुझं, अन् माझंही.
आपल्या प्रेमपूर्तीनंतर ते तुझं भावविवश होणं..
आठवतं तुला?

आठवतात तुला?
आपण घेतलेल्या आणाभाका,
अन् सोबतीने केलेला आजवरचा प्रवास
जीव ओतून केलं हे सारं काही.
संसाराचा श्रीगणेशा करताना आले कसोटीचे कित्येक क्षण..
अशा वळणवाटांमधूनच तर शिकत गेलो, जगत गेलो.
कधी हसत, कधी बोचरं दुःख झेलत..
आठवतं तुला?

आठवतं तुला?
वडीलधारे काळाच्या पडद्याआड गेले,
नवीन जीव आयुष्यात आले,
अनेक स्थित्यंतरं पहिली आपण..
आयुष्याचे तुकडे कधी विखुरले, कधी जुळून आले
कधी आधार बनलो, कधी उन्मळून पडलो
एकमेकांना दुखावलंदेखील..
आठवतं तुला?

आठवतं तुला?
केवढं मोठ्ठं झाल्यासारखं वाटायचं, तिशी म्हणजे!
आता वळून पाहताना वाटतं,
एक पायरी होती ती फक्त
जिने आपल्याला इथवर आणून सोडलं..
या साऱ्या गतकाळाचा पुनःप्रत्यय घ्यायचा ठरवलं होतं आपण!
आठवतं तुला?

आठवतं तुला?
ठरवलं होतं आपण..
की आपल्या म्हातारपणी,
आपली पाखरं मोठी होऊन उडून गेल्यावर,
दुःख नाही; तर समाधान मानायचं ..
एक सुंदर आयुष्य मनसोक्त जगू शकलो याचं!!
आठवतं तुला...?


निभावून वाटेतले


निभावून वाटेतले हेलकावे
किनार्‍यावरी नाव आता विसावे
उन्हामागुनी ये जसे चांदणे हे
असे शांत अल्वार आता जगावे |

कधी जाळतो यातनांचा निखारा
सुखाचा कधी शांतवी गार वारा
नवी वाट शोधून वाहे तरीही
तुझ्या जीवनाची अखंडीत धारा
प्रवासात या रंग न्यारे भरावे
पुन्हा एकदा तू नव्याने रमावे |

कधी पुस्तकांशी सुसंवाद व्हावा
कधी मैफिलीचाही आनंद घ्यावा
जगाची कधी तू करावी भ्रमंती
कधी स्वांतसौख्यास ही वेळ द्यावा
जगावे, पुन्हा एकदा तू जगावे
नव्या रंगगंधांसवे दर्वळावे |

१६ जानेवारी, २०१६

सख्या रे..

तुझ्यामाझ्यात सख्या रे नाही अंतर उरले
माझ्या काळजाचे ठोके तुझ्या उरात वाजले

माझे मीपण सख्या रे गेले मला सोडुनिया
देह उपचारासाठी; मन तुझ्यात गुंतले

भूक तहान सख्या रे कशाचेच भान नाही
माझे जगणे मरणे तुझ्या प्राणाशी बांधले

माझ्या लोचनी सख्या रे तुझे सुहास्य निर्मळ
डोळां दिसेना काहीही; पाणी बरसू लागले

सदा हृदयी सख्या रे बोल तुझेच नादती
मीरेसम मन माझे तुझ्या रंगात रंगले


१० नोव्हेंबर, २०१५

!शुभ दीपावली!



                                 तेजोमय दीपज्योत
                                उजळता अंगणात
                                भिजो तिच्या किरणांत
                                अंतर्मन |


                                इवल्या पणती पोटी
                                वात तेवता गोमटी
                                चैतन्याचे मिळो दिठीं
                                वरदान |


                                होता तिमीर काजळी
                                प्रकाशून सोनसळी
                                भरो सौख्याने ओंजळी
                                चिरंतन |



                                || शुभ दीपावली ||



०६ नोव्हेंबर, २०१५

बंदिश

बूँद बूँद जो बरस जात री
रैन भिगोके कारी,
रोम रोम अब तरस जात री
चैन न बिन तेहारी..


घननन गरजत आयी बदरी
रितु बरखा लायी री,
अखियन पी की प्यास लगी री
बीती रतिया सारी..



११ सप्टेंबर, २०१५

बारिश

गाड़ी रुकी हुई है एक जगह पर
मूसलाधार बारिश जो हो रही है..

खिड़की की चौखटसे बाहर गिरती
मोटी मोटीसी बूँदे
जुदाई सही नही जा रही इनसे शायद
बेताबी से गले पड़ रही है ज़मीं के
और बिखर रही है मोतियों की तरह
ये एक मोती गिरा
ये दूसरा
ये तीसरा...

'मोती बिखर चुके है जानू,
धागा तोड़नेका वक़्त आया है'
'इसे कैसे तोड़ू?
इसीने तो जोड़ा था'...

'यही मोती है जानू
जो हमारी जिंदगी सजाएँगे'
'ये कभी टूट गये तो?'
'धागा तो क़ायम है
नये मोती जोड़ देता है'...

'धागा जोड़ देता है नये मोतियों को
कभी तुम्ही ने कहा था'
'सीले धागे खुद कमज़ोर होते है जानू
उनसे जोड़ने की उम्मीदे नही होती'...

कोई बता दो इन बूँदों को
सीली है वो
बेताबी से गले पड़ रही है ज़मीं के
पर बिखर रही है मोतियों की तरह

गाड़ी रुकी हुई है एक जगह पर
मूसलाधार बारिश जो हो रही है..

१० जुलै, २०१५

संध्यारंग




आसमंती रक्तिम्याची ओसरू लागे नशा
सावळीशी शाल घेती पांघराया या दिशा

गर्द हिर्व्या पर्णवेली डोलती वाऱ्यावरी
श्यामवेळी पाखरे येती फिरूनी त्यावरी

नागमोडी वाट रंगे जांभळ्या रंगातुनी
सांडलासे रंग तोची दाट त्या छायांतुनी

दूर सीमा केशराची होऊ लागे शामला
माखु लागे काजळाने पर्वतांची शृंखला

नीलवर्णी त्या जलौघी चांद्रवर्णी झालर
पैलतीरी कातळी, प्राचीन शोभे मंदिर

भंगवी निःशब्दतेला स्वर्णघंटा मंदिरी
पूरियाचे रंग ल्याली कृष्णसंध्यासुंदरी!







१२ जून, २०१५

स्मृती

नभोदरात गर्जती अशांत मेघ सावळे
इथे मनात माझिया तुझ्या स्मृतींचि वादळे!

क्षणात मौक्तिके खुळी विसावली कळ्यांवरी
कसे जुळून येति हे ऋणानुबंध आगळे!

उनाड वात वाहता उरामधून मातिच्या
थरारत्या हवेतुनी तुझाच गंध दर्वळे!

उधाणत्या सरींतुनी तुझे सुहास्य सांडले
भिजून चिंब जाहले तृषीत श्वास कोवळे!

अजाण ऊर्मि अंतरी तुझाच स्पर्श चेतवी
अनाम आर्त भाव हा तुला कळे मला कळे!

तनामनात ही अशी जणू सतार वाजते
तशात रम्य धुंद हा अखंड मेघ कोसळे!


३० मे, २०१५

|| अभंग ||

चित्त होय दंग दंग
सुखे गाय वो अभंग

फुटे टाहो अंग अंग
देवा तुजा लाभो संग

मती स्मृति ऐशा गुंग
देखी तुजे रूप, रंग

अता होवो गा निःसंग
वसो मनी पांडुरंग |


१२ मे, २०१५

Memories

My heart still lives in the reveries
Our time together, etched in my memories...

The time when our lives intertwined
When one was always on the other's mind
The time when we walked hand in hand
Has slipped through my fingers..
It slipped through my fingers like sand...

You touched my life, you touched my soul
I looked up to you, to make me whole
You were the reason of my very being
Now, life goes on...
Life goes on without any meaning...

As I turn & look back at the past
The moments blurred & fading so fast
I try like mad to hold on to them
Without you by my side...
Without you by my side now, it isn't the same...

Sometimes I remember hanging out together
Out on the hill, how we chatted in leisure
A flame of hope then burns inside me
And I refuse to accept...
I refuse to accept that it's not meant to be...

My heart still lives in the reveries
Our time together, etched in my memories...

१६ एप्रिल, २०१५

टक्कर दे!

डरे, भेदरे, उगा थरथरे का शूरांचे अंतर रे?
टक्कर दे तू आयुष्याला पाय रोवूनि खंबीर रे!

का माघारी येसि परतून का नमते तू घेसि असा
जाण लढाई अस्तित्वाची टाकु नको धैर्याचा वसा
देवपणा ये दगडालाही घाव सोसता अविरत रे!
टक्कर दे तू आयुष्याला पाय रोवूनि खंबीर रे!

घेउनि जळती मशाल हाती अज्ञाताच्या वाटा तुडवी
अंधपांगळा भले जरीहि जो तो अपुले जीवन घड्वी
कुणा ना चुकली संसारी या  संघर्षाची ज्वाला रे!
टक्कर दे तू आयुष्याला पाय रोवूनि खंबीर रे!

कशास सीमा क्षितिजापाशी? नक्षत्रांचा ध्यास हवा
दीप आशेचा उरी तेवता जन्माला ये अर्थ नवा
स्वप्न तेच साकार होई जे जागृत नयनी वसते रे!
टक्कर दे तू आयुष्याला पाय रोवूनि खंबीर रे!


०९ मार्च, २०१५

दाटून येई..


दाटून येई अंधार
गहिरा हो आसमंत
ते झेलत टपोरबिंदु
डुलतो हळू प्राजक्त..

या वेड्या काजळवेळी
तव आठवणींचे पूर
पानांतुन ओल्या झरती
गर्भिचे अव्यक्त सूर..

क्षितिजाशी तेवे माझ्या
अंधूक एकटा तारा
आभास तिथे निळसर
अन् इकडे संततधारा..

पडद्याशी जळते ज्योत
पडद्यापलीकडे पाणी
फुलांतून प्राजक्ताच्या
नादतात सर्द विराणी..

पाऊस तिन्हीसांजेला
असाच बरसत राही
मातीत उमटती रेषा
अन् शुभ्रकेशरी काही!


०६ मार्च, २०१५

जाने क्यूँ

जाने क्यूँ ऐसा लगता है..
               तू है कही आसपास
               तू भी करे मेरी तलाश
               मेरी सूनी आँखोंकी प्यास
               बुझाए तेरी बस एक साँस
          मेरे करीब आकर, मुझे गले लगाकर
जाने क्यूँ ऐसा लगता है..

जाने क्यूँ ऐसा होता है..
               के गुनगुनाए रात
               लिए तारोँकी सौगात
               धूपमें हो बरसात
               और छेड़े वो दिलकी बात
          मेरा जहाँ है तू, तूही मेरी आरजू
जाने क्यूँ ऐसा होता है..

जाने क्यूँ चलते रहते है..
                चाहतोंके सिलसिले
                और उल्फ़त की महफ़िले
                क्यूँ हो शिकवे गीले
                गर दिल से दिल हो मिले
          यूँ ही हमसफर के साथ, लिए हाथोंमें हाथ
जाने क्यूँ चलते रहते है..


१९ फेब्रुवारी, २०१५

मीलों नही..

मीलों नही आहटें कोई, बस तनहाई का आलम है
यूँ तो मुसल्सल चलते रहें, पलकोंके किनारे मगर नम है

ज़िंदगियाँ आशिकानी थी वो, एक धागेमें जो पिरोयी थी
ज़िंदगी आजभी कायम है, साँसों की हरारत ज़रा कम है

दिन आँखोमें गुजर गये, रातें ख्वाबोंमें बीत गयी
कुछ यादें सरहाने रह गयी, लम्होंके सिरे मगर गुम है

उस वक़्त की छीटें पड़ती है, आजभी जब दिल पे कभी
कुछ पल वो शोले बुझते जिनमे, बूँद बूँद पिघले हम है

यही सफ़रकी फ़ितरत है, सब अपनी अपनी राह चुने
दो जहाँ तक़सीम हुए जब, उस मोड़पे आने का गम है


०२ फेब्रुवारी, २०१५

Translation: Sakhi mand jhalya

Original Lyrics: 
सखी मंद झाल्या..

सखी मंद झाल्या तारका, आता तरी येशील का?

मधुरात्र मन्थर देखणी, आली तशी गेली सुनी
हा प्रहर अंतिम राहिला, त्या अर्थ तू देशील का?

हृदयात आहे प्रीत अन् ओठांत आहे गीतही
ते प्रेमगाणे छेडणारा तो सूर तू होशील का?

जे जे हवेसे जीवनी ते सर्व आहे लाभले
तरीही उरे काही उणे तू पूर्तता होशील का?

बोलावल्यावाचूनही मृत्यू जरी आला इथे
थांबेल तोही पळभरी पण सांग तू येशील का?


English version:
The gleaming stars..

The gleaming stars of night have paled, my dear
Yet you aren't in sight, will you ever be with me here?

Charming night of melancholy, has grown & receded slowly
To its last moments remaining, will you give a new meaning?

My heart brims with love & lips croon a sweet song
Stringing together dulcet tones, will you be my melodious twang?

I own everything ever desired by a soul,
Yet, a part of me feels missing, will you be the one who makes me whole?

Even if the angel of death comes calling on me,
He''ll hold on for a moment, But.. will you ever be here with me?

१४ जानेवारी, २०१५

मन

अनूठी एक पहेली है
सुलझाए न सुलझती है
मन समझ नही पाता है,
मन क्या चीज़ होती है..

                                       जलता हुआ अंगारा है
                                       मन नदिया की धारा है
                                       कभी एक जगमग तारा है
                                       कभी घना अंधियारा है
                                       लाख बुझाओ न बुझनेवाली
                                       ये दिये की बाती है..

खुशियोंका त्योहार है
मन, रंगोंकी बौछार है
ऊँचे गगनमें लहराता मन
कतरेमेंभी समाता है
ये पलभरकी है खामोशी जो
दो सुरोंको मिलाती है..

                                       आँखोसे छलकता आँसू है
                                       होठोंकी दबी मुस्कान है
                                       मान है, अभिमान है
                                       मन अस्तित्व की पहचान है
                                       है साथमें चलती परछाई
                                       ये कभी हाथ ना आती है..

अनूठी एक पहेली है
सुलझाए न सुलझती है
मन समझ नही पाता है
मन क्या चीज़ होती है..


२४ डिसेंबर, २०१४

तलाश

एक ऐसी शाम की तलाश है..
जब दिनकी रोशनी शरमाके सिमटने लगे,
और हलके हलके बढ़ने लगे अंधेरेकी गहराई
सारे माहौल में सुनाई दे खामोशी की सदा,
और नन्हासा एक चराग़ धीमेसे जलने लगे..
एक ऐसी शाम की तलाश है, जिस वक़्त,
जिंदगी उस चराग़की जलती हुई तिलस्मी लौ बन जाए..
एक ऐसी लौ की तलाश है..

एक ऐसी लौ की तलाश है..
जो जीती है मद्धम साँसों में,
पर डटकर सामना करती है आँधियों का
जिसकी सच्ची आँच की कशिशसे
परवाने खींचके चले आते है फ़ना होने के लिए
एक ऐसी लौ की तलाश है, जिससे,
धुंधली सी सड़कपर भी मंज़िल साफ़ दिखाई दे..
एक ऐसी मंज़िल की तलाश है..

एक ऐसी मंज़िल की तलाश है..
जो चलने पे मजबूर करे
हर एक राह जहाँ आके जुड़ जाए,
और जोश दिलाए ज़ुर्रत करनेके लिए,
ताक़ि उस तक पहुँचनेक़ा इक़रार कर बैठे
एक ऐसी मंज़िल की तलाश है, जो,
असल में घर आने का एहसास दिलाए..
एक ऐसे घर की तलाश है..

एक ऐसे घर की तलाश है..
जो कभी ख़्वाबों में देखा था,
और रखा था दुनिया से दूर, कहीं छुपाके
जिसका अरमान लिए जीते थे इस उम्मीद पे
की पनाह मिलेगी वहाँ एक आवारा रूह को
एक ऐसे घर की तलाश है, जहाँ,
ढलती हुई हर शाम की फलक रंगीन हो ..
एक ऐसी शाम की तलाश है..

एक ऐसी शाम की तलाश है..


१७ डिसेंबर, २०१४

Translation: Tik tik vaajate dokyat

Original Lyrics: 
टिक टिक वाजते..

टिक टिक वाजते डोक्यात
धड धड वाढते ठोक्यात
कभी ज़मीन कधी नभी, 
संपते अंतर झोक्यात

नाही जरी सरी तरी भिजते अंग पाण्याने
सोचू तुम्हे पलभर भी बरसे सावन जोमाने
शिंपल्यांचे शो-पीस नको
जीव अडकला मोत्यात

सूर ही तू ताल ही तू
रूठे जो चाँद वो नूर है तू
आसु ही तू हसू ही तू
ओढ मनाची नि हूरहुर तू
रोज नवे भास तुझे
वाढते अंतर श्वासात


English version:
In my brain..

In my brain, a clock ticks
Even faster, my heart beats
On earth at times, in the sky in a trice
The distance ebbs away, with each mild sway..

There're no rains, yet I feel drenched fully
One thought of you & it pours profusely
I have no wish for a seashell trinket
It's on the real pearl that I have my heart set..

You are my rhythm, you are the tune
You are the light of the sulking moon
You are my teardrop, you are my laughter
You are melancholy & you are my ardor
Yet the distance grows, in a breath's time,
With each new illusion, of you in my mind..

२७ सप्टेंबर, २०१४

Mangalyaan - A tribute

The idea was greeted
With doubts & qualms
Yet, you dared
To cross usual realms
24th September 2014 - India's Mangalyaan entered
the Martian orbit in first attempt.

The task was huge
and constraints many
The time was scant
and you owned a penny!

To the world, it was
A quixotic fantasy
For you, a step closer
to reach the Galaxy

You rolled up your sleeves
and bowed down to work
On days and nights,
Even amid the murk

To make the impossible
possible, You had vowed
With merest luxuries,
Hardly any rest allowed

And then the day dawned..
Yaan entered the Martian air!!
A triumph of mankind,
Unparalleled and so pure!

You made India proud
You gave us a red letter day
Take a bow, Scientists!
Your dream is reality today

To explore the unknown,
It was a small start
Brahma is now smiling, as we're
An inch closer to his heart!


०४ सप्टेंबर, २०१४

असे वेड..

असे वेड जीवास लावलेस तू,
अनोळखी झाले सारे रोजचे ऋतू

नवे गीतही आज कोकिळकंठी
नवे पहाटरंग अन् लागले फुटू

नभी उडे, कधी होई फुलपाखरू
पहा तोल या मनाचा लागला सुटू

असा दाटे उन्माद उरी, अंतरी
की वाटे, आज वाण आनंदाचे लूटू

रोमरोमांत असा भिनलास रे
मला व्यापूनीही, जरा उरलास तू..